छुप-छुप के मोहब्बत निभाती रही हूँ मैं कि जिस रोज वो नही सोया खुद को जगाती रही हूँ मैं। अक्सर रूठ जाता है मेरी इस बात से वो उसके जर्रे-जर्रे में अपनी धूल उडाती रही हूँ मैं। कात...
कभी फुर्सत में मिलो तो फुर्सत से बात करते हैं क्या कहा बात नहीं करनी, तो चलो थोड़े इल्ज़ामात करते है। अरे यूँ रूठ के ऊठना, ऊठ के मुडना और मुड़ के चले जाना, अच्छा नहीं है, अगर नार...
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