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वार्तालाप अहम है!

             कल शाम बड़ी देर तक रास्ता देखती रही, तुम कुछ देर से घर आये,पूछने का मन तो हुआ फिर वही रोज-रोज की किच-किच का सोचकर चुप रह गयी। कल मेरी रचना प्रकाशित हुई थी। तुम्हें अख...

शोर होना चाहिए!

जल गया दीपक अपनी ही आग से, क्या ढूँढते हो अब बची इस राख में। विश्व ने माना लोहा जिसका, वो तिरंगा झुका जा रहा अपनी ही आँख में। जीत जाते गर जंग बाहरी होती, हम हारे अपनी आस्तीन के सा...

मां भारती

घात ह्रदय पर बैचेन मन हैं, उदास चित्त और भींगे नयन है। मेरा देश ऐसा नही है, माँ के बिन बच्चा सोता नही है। भटके हुए कुछ नादान हैं मां, दिलों में घृणा की अगन हैं। तुझसे प्रेम बहुत...

सोचती हूँ!

चमक बहुत  है उसमे सोचती हुँ वो चाँद तो नही । मुश्किल है उसे सच कहना सोचती  हूँ वो ख्वाब तो नही। आस-पास लगते हो वाकई तुम साथ तो नही। दर्द से ज्यादा तड़प है तुम कहो ये दर्द अज़ाब ...

टीस........

सुना है मेरे बाद तुम जिसके बिस्तर की सलवटें हो गई .... वो किसी का रूमाल हो गया है? लैला किसी की, मजनू किसी का देख जरा मोहब्बत.... तेरा क्या हाल हो गया है।

हर्ज़

कभी फुर्सत में मिलो तो फुर्सत से बात करते हैं क्या कहा बात नहीं करनी, तो चलो थोड़े इल्ज़ामात करते है। अरे यूँ रूठ के ऊठना, ऊठ के मुडना और मुड़ के चले जाना, अच्छा नहीं है, अगर नार...

बहुत भोले हो....

छुप-छुप के मोहब्बत निभाती रही हूँ मैं कि जिस रोज वो नही सोया खुद को जगाती रही हूँ मैं। अक्सर रूठ जाता है मेरी इस बात से वो उसके जर्रे-जर्रे में अपनी धूल उडाती रही हूँ मैं। कात...